CONTRACTUAL EMPLOYEES

CONTRACTUAL EMPLOYEES को खुशखबरी सुप्रीमकोर्ट ने अब सभी को करेगी परमानेंट

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CONTRACTUAL EMPLOYEES के बारे में आज मैं आपके साथ डिस्कस करने जा रहा हूं। सुप्रीम कोर्ट की लेटेस्ट जजमेंट जो कि सर्विस मैटर्स  के अन्तर्गत CONTRACTUAL EMPLOYEES से रिलेटेड है।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के बारे में

CONTRACTUAL EMPLOYEES का यह जो जजमेंट है यह टेंपरेरी एंप्लॉयज के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यह जजमेंट 20 दिसंबर 20224  को  जस्टिस  विक्रम  नाथ  और  जस्टिस  प्रसन्ना  भी  वर्ले  द्वारा पास की गई है। अब कैसे यह जजमेंट टेंपरेरी एंप्लॉई के लिए जो गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में एडक बेसिस पे या पार्ट टाइम जॉब करते हैं।CONTRACTUAL EMPLOYEES

CONTRACTUAL EMPLOYEES उनके लिए मील का पथ साबित होगी आज पूरा इसको डिस्कस करेंगे अब  यह जो पूरा  मामला है। यह पांच एंप्लॉई से रिलेटेड है। जो कि सेंट्रल वोटर कमीशन के अंदर डोग बेसिस पर पार्ट टाइम बेसिस पर और डिफरेंट डिफरेंट पोस्ट पे कोई गार्डनिंग पे कोई सफाई कर्मचारी के रूप में एडोब बेसिस पर डिपार्टमेंट के अंदर रखे जाते हैं।

अलग-अलग टाइम पे और लगभग यह 10 साल तक वहां पर जॉब करते रहते हैं। अब यह पांचों के पांचों एंप्लॉई लगभग 10 साल बाद 2015 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के सामने  अपनी  एंप्लॉयमेंट को परमानेंट करने के लिए पेटीशन फाइल करते हैं। अब इसमें सुनवाई चलती है।

और 2018 में इनकी इस पेटीशन को ट्रिब्यूनल  द्वारा  डिस्मिस  कर  दिया  जाता  है।  जैसे  ही ट्रिब्यूनल इनकी पेटीशन को डिस्मिस करता है। सीडब्ल्यूसी इमीडिएट इनको इनकी पोस्ट से टर्मिनेट कर देती है। बिना कोई नोटिस दिए अब यह पांचों के पांचों एंप्लॉई दिल्ली हाई कोर्ट के सामने ट्रिब्यूनल के इस फैसले को और सीडब्ल्यूसी के टर्मिनेशन को चैलेंज करते हैं।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए दिल्ली हाई कोर्ट

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए अब दिल्ली हाई कोर्ट इस पूरे मामले को सुनती है। और ट्रिब्यूनल के द्वारा पास किए गए ऑर्डर को ठीक ठहरा है। साथ ही एक पुराना मामला जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा पास  किया  गया था जहां पर यह बोला गया था। कि अगर कोई भी एंप्लॉई टेंपरेरी से परमानेंट होगा तो उसके लिए क्या गाइडलाइंस होगी जिस जजमेंट का नाम था।CONTRACTUAL EMPLOYEES

स्टेट वर्सेस उमादेवी इस उमादेवी की जजमेंट का रेफरेंस भी देती है। और इन पांचों के पांचों एंप्लॉयज की पिटीशन को डिस्मिस कर देती है। अब जब दिल्ली हाई कोर्ट से 20 के अंदर यह मामला डिस्मिस होता है। तो यह मामला पहुंचता है सुप्रीम कोर्ट अब सुप्रीम कोर्ट के अंदर जब यह मामला पहुंचता है।

तो पेटीशनर्स के द्वारा सर्टेन इसके अंदर दलीलें दी जाती है। वो दलीलें क्या है मैं एकएक करके आपकोबता रहा हूं। जिनके बेस पर यह पेटीशन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट  में  दायर  करी  थी नंबर वन कंटीन्यूअस एंड सब्सटेंटिव एंगेजमेंट मतलब क्या है। इसका उन पेटीशनर्स का यह कहना था।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए सुप्रीम कोर्ट

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने कि वह लगभग 10 साल से लगातार सीडब्ल्यूसी के अंदर काम कर रहे पार्ट टाइम जॉब कर रहे हैं। एडब बेसिस पर जॉब कर रहे हैं। और बीच में उनको कभी भी वहां से निकाला नहीं गया नंबर टू अब्सेंस ऑफ परफॉर्मेंस इशू अब इन पेटीशनर्स के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी बोला जाता है।

कि इनके 10 साल के एंप्लॉयमेंट के अंदर कभी भी इनके अगेंस्ट कोई भी किसी भी तरीके की शिकायत नहीं आई है। नंबर थ्री कंप्लायंस विद उमादेवी जजमेंट अब यहां पर इन पिटीशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह भी बोला जाता है। कि इनके ऊपर उमा देवी की जो जजमेंट थी।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए जहां पर सर्टेन गाइडलाइंस तैयार करी गई थी वो इनके ऊपर लागू होती है। क्योंकि मैं आपको बता देता हूं। उमा देवी की जजमेंट के अंदर यह बोला गया था। अगर कोई भी पर्सन  इल्लीगल  तरीके  से  अगर  किसी का एंप्लॉयमेंट लिया गया है। टेंपरेरी तो उसको परमानेंट नहीं करा जाएगा लेकिन अगर किसी का इरेगुलर तरीके से अपॉइंटमेंट हुआ है।

चाहे वो अडॉप्ट बेसिस पे हुआ और एक लंबे टाइम तक अगर सर्विसेस देता है। तो उस पर्सन को परमानेंट कर दिया जाना चाहिए तो यहां पर उन्होंने बोला है। कि इनके ऊपर उमादेवी की जो गाइडलाइंस है। वो पूरे तरीके से लागू होती है। नंबर फोर डिस्क्रिमिनेशन इन रेगुलराइजेशन अब इन पांचों एंप्लॉयज का सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी कहना था।

यह एलिगेशन था कि डिपार्टमेंट द्वारा सीडब्ल्यूसी द्वारा सर्टेन एंप्लॉयज को जो पार्ट टाइम बेसिस पे आए या डोब बेसिस पर है। और इनके बाद में आए हैं। उनको रेगुलराइज कर  दिया  गया  और  उनको परमानेंट कर दिया गया है। जबकि इनकी एप्लीकेशंस को हमेशा दरकिनार करा गया है।

CONTRACTUAL EMPLOYEES की शैक्षिक योग्यता

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए नंबर फाइव इरेलीवेंस ऑफ एजुकेशनल क्वालिफिकेशन अब इनका ये भी कहना था क्योंकि लंबे समय से एक पर्टिकुलर स्किल सेट के साथ इस डिपार्टमेंट में काम कर रहे थे। तो इनकी एजुकेशन क्वालिफिकेशन के ऊपर कभी भी क्वेश्चन मार्क नहीं आना चाहिए क्योंकि हाई कोर्ट में और ट्रिब्यूनल में दोनों जगह गवर्नमेंट का यह कहना था।

कि इनको रेगुलराइज या इनको परमानेंट इसलिए नहीं किया जा सकता है। कि जिसपोस्ट पे ये जॉब कर रहे हैं। वहां पर एक सर्टेन एजुकेशन क्वालिफिकेशन की रिक्वायरमेंट है। अब सुप्रीम कोर्ट में इनका यह कहना था। कि क्योंकि एक लंबे टाइम से ये 10 साल से भी ज्यादा से इस डिपार्टमेंट में अपनी सर्विसेस दे रहे हैं। तो

इनके स्किल सेट को इनकी की क्वालिफिकेशन के आगे नहीं आना चाहिए इसलिए इनकी क्वालिफिकेशन को ध्यान में ना रखा जाए और इनको परमानेंट कर दिया जाए अब सुप्रीम कोर्ट ने सारा मामला सुनने के बाद इन पेटीशनर्स को सुनने के बाद यह पूरा का पूरा फैसला अपना सुनाया था।

और जहां पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया और सीडब्ल्यूसी के टर्मिनेशन को भी क्श कर दिया और साथ ही डिपार्टमेंट को ये आदेश दिए कि इन एंप्लॉयज को परमानेंट कर दिया जाए जब सुप्रीम कोर्ट ये फैसला सुना रही थी। तो वहां पर उन्होंने टेंपरेरी एंप्लॉयज के लिए सर्टेन बातें भी बोली वो क्या बातें हैं।

मैं आपको बताता हूं नंबर वन मिसयूज ऑफ टेंपरेरी लेवल सुप्रीम  कोर्ट  का  यह बोलना था। कि जितने भी डिपार्टमेंट्स के अंदर इस तरीके से टेंपरेरी बेसिस पे पार्ट टाइम बेसिस पे डोग बेसिस पे जो एंप्लॉई रखे जाते हैं। उनके साथ मिसयूज करते हैं। एक लेवल लगा कर के कि आप तो टेंपरेरी हो और आपको परमानेंट जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए नंबर टू आर्बिट्रेरी टर्मिनेशन जैसा कि इस मामले में हुआ  जैसे  ही  ट्रिब्यूनल ने अपने देश दिया बिना कोई नोटिस दिए बिना इनको टर्मिनेट कर दिया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने यहां पर यह भी बोला कि इन टेंपरेरी एंप्लॉयज को जब टर्मिनेट किया जाता है। तो कोई भी रूल फॉलो नहीं किया जाता इनको नोटिस तक नहीं दिया जाता है।

नंबर थ्री लैक ऑफ कैरियर प्रोग्रेशन अब सुप्रीम कोर्ट  का  इन  टेंपरेरी  एंप्लॉयज के लिए यह भी बोलना था। इन टेंपरेरी एंप्लॉयज को लंबे टाइम तक काम करने के  बावजूद  भी  कोई  प्रमोशन  नहीं  मिलता है। इनको कोई करियर का आगे अपग्रेडेशन नहीं होता है। तो इनकी जो हालात है। वो बहुत अच्छे नहीं होते हैं।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए गवर्नमेंट डिपार्टमेंट

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए गवर्नमेंट डिपार्टमेंट में नंबर फोर यूज यंग आउटसोर्सिंग एज ए शील्ड अब सुप्रीम कोर्ट ने यहां पर आउटसोर्सिंग को लेकर के भी तंज कसाए वहां पर यह भी बोला  है। कि  जितने भी  डिपार्टमेंट  है  जो  टेंपररी  एंप्लॉयज  को रखते हैं। वहां पर वह आउटसोर्सिंग के नामपर अब इसको एक शील्ड बना कर के ले आए हैं।

कि हमारे डिपार्टमेंट में तो अब हम बाहर से एंप्लॉयज को आउटसोर्स  कर  रहे हैं। इसलिए हम इस तरह के एंप्लॉयज को रखना नहीं चाहते हैं। तो यह सारी बातें  बोलते  हुए  सुप्रीम  कोर्ट  ने टेंपरेरी एंप्लॉयज के लिए खास करके इस पेटीशन के अंदर एक बड़ा रिलीफ दिया है। तभी मैं बोल रहा हूं। आने वाले समय में यह जो जजमेंट है। टेंपरेरी एंप्लॉयज के लिए एक मिल का पत्थर साबित हो सकती है।

CONTRACTUAL EMPLOYEES के लिए तो दोस्तों इस जजमेंट के बारे में आपका क्या कहना है। कमेंट बॉक्स में लिख करके जरूर बताइएगा मैंने इस जजमेंट का लिंक और डिटेल डिस्क्रिप्शन बॉक्स में डाल दिया है वहां से आप इसको पढ़ भी सकते हैं। और यूज भी कर सकते हैं। आने वाले समय में मैं आपको और भी सुप्रीम कोर्ट की लेटेस्ट जजमेंट से अवगत कराता रहूंगा।

दोस्तों मेरी CONTRACTUAL EMPLOYEES की जानकारी में अपनी राय और प्रतिक्रिया अवश्य करें। जिससे मैं आयी हुयी कमियों में हम सुधार कर सकें।

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