Now this contract workers permanent

Now this contract workers permanent सुप्रीम कोर्ट/सरकार की बड़ी सौगात

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Now this contract workers permanent में दोस्तों  पूरे  देश के  संविदा कर्मचारियों के पक्ष में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2024 को एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। जिस फैसले में माननीय सुप्रीम कोर्ट Now this contract workers permanent ने कहा है।

Now this contract workers permanent के बारे में

Now this contract workers permanent के लिए 12 मासी यानी कि अस्थाई प्रकृति के कार्यों में लगे संविदा कर्मचारी को कांटेक्ट लेवर एक्ट 1970 के तहत  कांटेक्ट कर्मचारी नहीं माना जा सकता है। और वह परमानेंट होने के पात्र है आइए हम जानते हैं। की इस आदेश का लाभ किन-किन कर्मचारियों को मिलेगा और आखिर वो कौन सा मामला है।Now this contract workers permanent

जिसमें माननीय कोर्ट ने यह आदेश दिया क्या इस आदेश के बाद सरकारी विभागों में लगे अस्थाई प्रकृति के कामों में जो संविदा कर्मचारी हैं। उनके लिए कोई स्टेप लिया जाएगा या नहीं लिया जाएगा इसके साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि आखिर स्थाई प्रकृति का वह कौन सा काम है।

कौन सा बारामासी काम है  जिसमें  माननीय  कोर्ट  का  यह  आदेश आया  है। तो आइए हम इसको स्टेप  बाय स्टेप करके जानते हैं। और साथ ही इसका ऑर्डर का कॉपी अगर आप लेना चाहे तो कहां से लेंगे वो भी इस लेख में मैं  बताने जा रहा हूं दोस्तों आपको बता दूं कि पूरे देश के अंदर जो सरकारी विभाग है।उसमें जिस तरह से कांट्रैक्ट वर्कर रखे जा रहे हैं नियुक्त किए जा रहे हैं।

Now this contract workers permanent में यहां तक  कि  लगातार  चलने  वाले  कामों  में  भी कांट्रैक्ट वर्कर जैसे कि अग्निवीर हो गए रेलवे के अंदर देख लीजिए ऐसे-ऐसे करके हर विभाग में आज जिस तरह  से  कांटेक्ट वर्कर रखे जा रहे हैं। वैसे में माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश है। वो सरकार के मुंह पे एक तरह से तमाचा है। और तो और कांट्रैक्टर के द्वारा जिन लोगों को रखा जाता है। उनका जैसे ही 12 महीना 11 महीना पूरा हो जाता है।

Now this contract workers permanent के लिए कार्य की समयावधि

Now this contract workers permanent  में  वैसे ही  ठेकेदार  के  द्वारा  00 घूस  के  रूप  में  लिया   जाता  है  ताकि उनका जो कांट्रैक्ट है रिन्यूअल किया जा सकते यह पूरे देश में चल रहा है। केवल एक मंत्रालय की बात नहीं है। जिस तरह से हमारे पास मैसेज आ रहा है। ऐसे  में  माननीय  कोर्ट  का  जजमेंट  सरकार  के  उस कार्ज प्रणाली पर बहुत बड़ा सवाल उठाता है। आपको बता दें कि जस्टिस पीएस नरसिंहा और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है।

कि बारामासी अस्थाई प्रकृति का काम अनुबंध कर्मचारी से नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में उन्हें अस्थाई किया जानाचाहिए ऐसे  में  अब  यह  देखना  है।  कि  माननीय  सुप्रीम  कोर्ट के इस टिपणी से सरकार के ऊपर क्या प्रभाव पड़ता है। या फिर सरकार के द्वारा जो सरकारी विभागों के अंदर संविदा कर्मचारी को धरले से रखा जा रहा है। उस परे क्या असर आता है।

Now this contract workers permanent में कोर्ट का आदेश

Now this contract workers permanent के लिए भी बाद आप जरूर जानना चाहेंगे कि आखिर वो कौन सा मामला है। जिसमें कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ये  जजमेंट  दिया  है।  आपको  बता  दें  कि यह मामला कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी महानंदी कोल् फील्ड्स यानी कि अपील कर्ता जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंदर अपील लगाया था।Now this contract workers permanent

Now this contract workers permanent के  अन्तर्गत  उनके  द्वारा 32 कर्मचारियों  में  से  मात्र 19 कर्मचारियों को अस्थाई किया गया है। और बाकी 13 कर्मचारी को यह कहते हुए छोड़  दिया  गया  कि  आपका काम 12 मासी यानी कि अस्थाई प्रकृति का नहीं है। और उनको कांट्रैक्ट वर्कर माना  और  उनको परमानेंट नहीं किया और यहीं से मामला शुरू हुआ वर्कर्स यूनियन के तरफ  से  13 श्रमिकों  के  परमानेंसी के लिए अपील पर समझौता हुआ जबकि प्रबंधन ने मात्र 19 श्रमिकों को रेगुलराइजेशन करने पर विचार किया है।

और बाकी 13 को रेगुलराइज करने से मना कर  दिया  और  जिसके  बाद रीजनल लेबर कमिशनर सेंट्रल के पास यह माम मामला जाता है। और उनसे मामला होते हुए सेंट्रल गवर्नमेंट के थ्रू सीजीआईटी पहुंचता है। जिसके बाद सीजीआईटी यानी कि सेंट्रल ट्रिब्यूनल  ने 13  कर्मचारियों के काम  को 19 कर्मचारियों  के  काम के समान कहने का मतलब उनके काम का प्रकृतिक समान है।

19 को परमानेट किया गया था और 13 को प्रमाणित नहीं किया गया था और दोनों के काम को समान माना और समान मानते हुए 13 कर्मचारियों को रेगुलराइज करने का  आदेश दिया और साथ ही बकाया मजदूर के साथ जो परमानेंसी के लिए उनको लाभ भत्ता आदि मिलना था। उसका आदेश जारी किया साथ ही अपने आदेश में सीजीआईटी ने कहा है।

कि बंकर के अंदर रेलवे ट्रैक के बगल में सफाई का काम  करने  वाले कर्मचारियों का जो काम है बारामासी है। यानी कि अस्थाई प्रकृति का है। कहने का मतलब 12 महीना चलने वाला  काम है। और इसलिए सीजीआईटी ने 13 कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया जो फैसला प्रबंधकों को मंजूर नहीं होता है। वह हाई कोर्ट की शरण लेते हैं।

Now this contract workers permanent में हाई कोर्ट में जब मामला जाता है। तो हाई कोर्ट उनके मामले को सुन कर के और उनका जो एप्लीकेशन  है।  वह  रद्द  कर  देता  है  और  सीजीआईटी  के  उस  सले को बरकरार रखता है। अंत में महानंदी कोल् फील्ड्स के द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाता  है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील करता प्रबंधन ने यह तर्क प्रस्तुत किया कि ट्रिब्यूनल के पास श्रमिकों को अस्थाई दर्जा देने की कोई शक्ति नहीं है।

क्योंकि अपील करता प्रतिवादी  और  श्रमिक  यूनियन  के  बीच  समझौते को  सभी पक्ष मानने को बाध्य हैं जस्टिस पीएस नरसिंहा ने प्रबंधक के इस तरह के दलील  को  खारिज कर 13 श्रमिकों को परमानेंसी के केंद्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा जिसमें फैसले के प्रभाव के दिन से पिछला वेतन   बकाया प्रदान करने ने का निर्देश जारी किया गया था।

Now this contract workers permanent के  लिए  यहां  पे  फिर  से  एक  बार  प्रबंधकों  को मुंह की खानी पड़ी और माननीय कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि श्रेष्ठ कर्मचारी नियमित कर्मचारी के समान स्तर पर खड़े हैं। और उन्हें गलती से समझौते का हिस्सा नहीं बनाया गया यह ट्रिबल  द्वारा 19  कामगारों  के  पहले  समूह और अन्य 13 कामगारों के काम की प्रकृति की जांच करके स्थापित किया गया है।

Now this contract workers permanent के लिए कोर्ट ने आगे अपने आदेश में कहा कि अपील करता श्रमिकों के दो समूहों के बीच अंतर स्थापित करने में विफल रहा इसलिए सेंट्रल का संदर्भ का जवाब देना और यह निष्कर्ष देना उचित है कि वह नियमित कर्मचारियों के समान ही स्थिति रखते हैं बकाया वेतन के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माना कि श्रमिक बकाया वेतन के हकदार होंगे जैसा कि औद्योगिक न्यायक़कागी केशन के डेट से करना था।

और यहां पे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उनके के रोजगार प्राप्त करने की तिथि  से कर दिया तो कहने का मतलब एक तरह से जो उनके प्रबंधक हैं उनको लेने की देनी पड़ गई और कर्मचारियों को  जीत  मिली  एक  तरह से देखें तो अस्थाई प्रकृति के काम चाहे वो रेलवे के अंदर काम कर रहे हो सफाई का वो 12 मास चलने वाला है।

Now this contract workers permanent में विभिन्न कर्मचारी

पोस्ट ऑफिस के अंदर आप काम कर रहे हो वो 12 मास चलने वाला है। और ऐसे में स्थाई प्रकृति का जो भी काम है जो लगातार 12 मास चलता है। ऐसे कामों में संविदा कर्मचारियों को कांट्रैक्ट वर्कर को रखा जाता है। तो कहीं नाना कहीं वो रेगुलेशन की मांग कर सकते हैं। परमानेंट होने की मांग कर सकते हैं। और उसी के त तहत ये आदेश आया है।

और आपको बता दे कि हम लोगों ने भी काफी पहले से आईआरसीटीसी  के अंदर  जो  संविदा कर्मचारी कांट्रैक्ट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसीआधार पे परमानेंसी का हमने क्लेम लगा रखा है। और साथ ही एक और क्लॉज है। कि अगर कांट्रैक्ट झूठा है तो ऐसी स्थिति में भी आप परमानेंसी का मांग कर सकते हैं। ये हमने अपनी तरफ से बताया है।

हालांकि ये कोर्ट के ऑर्डर में नहीं है। अब ऐसे में ये देखना है कि पूरे देश के  अंदर  जितने  भी  सरकारी विभाग है। चाहे वो स्टेट गवर्नमेंट के हो या सेंट्रल गवर्नमेंट के जिसमें कि लगातार चलने वाला काम हो और ऐसी स्थिति में कई लोग 10 साल से काम कर रहे हैं। कोई 20 साल से काम कर रहे हैं। कोई 2 साल से काम कर रहे हैं।

Now this contract workers permanent वाले तो क्या ऐसे  लोगों  को  परमानेंट  सरकार  को  करना  चाहिए या नहीं करना चाहिए एक बार कमेंट्स करके जरूर बताइएगा और साथ ही बताइएगा कि आप कौन से विभाग में लगातार चलने वाले कामों में काम कर रहे हैं। जिससे कि पूरे देश तक यह मैसेज जा पाए और सरकार के ऊपर कहीं ना कहीं दबाव पड़े

Now this contract workers permanent में माननीय सुप्रीम  कोर्ट  के  इस  आदेश  को  पूरे  देश  के अंदर लागू करें जिससे कि कहीं ना कहीं कर्मचारियों को बेनिफिट मिल सके अगर आप इसको डिटेल में पढ़ना चाहते हैं। तो अगला लेख जल्दी डालने वाले हैं उस सारी जानकारियाँ मिल जायेंगी।

दोस्तों मेरी Now this contract workers permanent की जानकारी में अपनी राय और प्रतिक्रिया अवश्य करें। जिससे मैं आयी हुयी कमियों में हम सुधार कर सकें।

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