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This WhatsApp पर फ्री मिलेगी कानूनी सलाह नहीं पड़ेगी वकील की जरुरत ऐसे

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This WhatsApp में जरा सोचिए अगर कानूनी सलाह अब सीधे आपके This WhatsApp पर ऐसे मिलने लगे तो।

This WhatsApp के बारे में

This WhatsApp में जी हां आज हम भारत सरकार की एक ऐसी बहुत ही जबरदस्त पहल न्याय मिलने हेतु के बारे में बात करने वाले हैं। अच्छा जब भी कानून या कोर्ट कचहरी की बात आती है तो दिमाग में क्या आता है? अक्सर एक बहुत ही उलझी हुई, लंबी और महंगी प्रक्रिया है ना कोर्ट के चक्कर, वकीलों की भारी फीस यह सब ऐसी परेशानियां हैं जिनसे कई लोग गुजरते हैं।This WhatsApp

पर सोचिए क्या होगा अगर यही सारी कानूनी जानकारी और सलाह आपको अपने फोन पर ही मिल जाए। सरकार ने एक ऐसी सर्विस शुरू की है जो इस पूरे सिस्टम को बदल सकती है। और इसका नाम है न्याय सेतु। यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसे खासतौर पर उन सभी मुश्किलों को हटाने के लिए बनाया गया है जो एक आम इंसान को न्याय पाने से रोकती हैं।

This WhatsApp में कानूनी सलाह

This WhatsApp में मतलब इसका एक ही मकसद है कानूनी मदद को हर किसी के लिए आसान बनाना। तो भाई यह न्याय सेतु आखिर है क्या? और इसे चला कौन रहा है? चलिए, इसे थोड़ा और डिटेल में समझते हैं। देखिए, न्याय सेतु कोई प्राइवेट ऐप नहीं है। यह सीधे-सीधे भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय की एक पहल है।This WhatsApp

और इसका सबसे बड़ा काम है कानून की मुश्किल भाषा को एकदम आसान शब्दों में आम लोगों तक पहुंचाना। और यह प्लेटफार्म पुराने और नए तरीके के बीच का फर्क एकदम साफ दिखाता है। मतलब एक तरफ थे कोर्ट के ना खत्म होने वाले चक्कर और महंगी फीस और दूसरी तरफ है घर बैठे मुफ्त में जानकारी पाने का ऑप्शन। यह वाकई में एक बहुत बड़ा बदलाव है।

तो सवाल यह उठता है कि असल में मदद कैसे करता है? वेल, इसके जरिए आप अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जान सकते हैं। किसी कानून के किसी खास सेक्शन का मतलब पूछ सकते हैं या यह भी पता कर सकते हैं कि आपका केस किस कोर्ट में जाएगा और सबसे अच्छी बात यह सब आप सिर्फ टेक्स्ट या वॉइस मैसेज भेजकर कर सकते हैं।

This WhatsApp का इस्तेमाल

तो अब मन में आ रहा होगा कि इसे इस्तेमाल कैसे करना है। चलिए देखते हैं कि मदद पाने के लिए आखिर करना क्या होगा। इसे यूज करना बहुत ही सिंपल रखा गया है। आपको बस तीन आसान से स्टेप्स फॉलो करने हैं। पहला जो ऑफिशियल नंबर है उसे अपने फोन में सेव कर लीजिए। दूसरा अपना मोबाइल नंबर वेरीफाई करवाइए।

और बस हो गया। आप अपने सवाल पूछने के लिए बिल्कुल तैयार हैं और यह है वह ऑफिशियल This WhatsApp का नंबर जिसे आप न्याय सेतु सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए सेव कर सकते हैं। तो कुल मिला के इसके जो फायदे हैं वह हर नागरिक को ताकत देने के लिए हैं। यह आसानी से उपलब्ध है।

बिल्कुल मुफ्त है और सबसे बड़ी बात यह कानूनी प्रक्रिया के डर को काफी कम कर देता है। क्योंकि सारी जानकारी आपको आसान भाषा में डिजिटली मिल जाती है। यहां एक और बात समझनी बहुत जरूरी है। यह जो न्याय सेतु है यह कोई अकेली कोशिश नहीं है। यह भारत के जस्टिस सिस्टम को डिजिटल बनाने की एक बड़ी और लगातार चल रही कोशिश का हिस्सा है।

This WhatsApp की न्यायालय की समय सारणी

This WhatsApp में  यह टाइमलाइन दिखाती है कि कैसे पिछले कई सालों से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न्याय को हर किसी तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। यह सफर 2007 में ई कोर्ट्स प्रोजेक्ट से शुरू हुआ था और आज न्याय सेतु तक पहुंच गया है। तो इन सभी बदलावों को देखते हुए एक सवाल तो बनता है कि हमारे देश में न्याय का भविष्य आखिर कैसा दिख रहा है?

देखिए बात सीधी सी है। टेक्नोलॉजी एक आम नागरिक और कानून के बीच के रिश्ते को पूरी तरह से बदल रही है। अब न्याय पाना पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी, तेज और आसान होता जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे हम टेक्नोलॉजी पर और ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। एक बहुत बड़ा सवाल भी सामने आता है।

This WhatsApp के लिए सुप्रीमकोर्ट की सलाह

This WhatsApp में दोस्तों, इस लेख में आगे जाने से पहले आप अपने मोबाईल या लेपटॉप के स्क्रीन पे देख रहे होंगे कि हमारे जो परसेंटेज ऑफ व्यूअर्स हैं। नॉट सब्सक्राइब वो 96% है। ऑलमोस्ट 96% है। मतलब हमारे लोग लेख तो पढ़ रहे हैं। मगर सब्सक्राइब नहीं करते।

तो आपसे निवेदन है कि अगर आप लोग हमारे चैनल पे नए हैं या फिर आपने अभी तक हमारा चैनल सब्सक्राइब नहीं किया है। तो प्लीज सब्सक्राइब चैनल techlabnol.com कर लीजिये। अब बात आती है। कि जो 19 अगस्त 2025 का जजमेंट है वो प्रीवियस जजमेंट से अलग कैसे है?

इसमें कोर्ट की क्या ऑब्जरवेशंस रही है? और फाइनली इस ऑर्डर में कोर्ट ने क्या डायरेक्शन दिए? स्पेसिफिकली स्टेट को। देखिए, पहले हम बात करें जब भी नियमितकरण की बात आती है तो सरकार टेंपरेरी एंप्लाइजज़ को नियमतीकरण नहीं करती है।

उसके जो कारण बतातें है कॉमन जो रीज़ंस होते हैं। वो ये होते हैं कि ये कॉन्ट्रैक्ट लेबर्स है। सेकंड कारण होता है। कि सेंक्शन पोस्ट नहीं है। तीसरा होता है कि वैकेंसी नहीं है जिनके अगेंस्ट इन कॉन्ट्रैक्ट एंप्लाइजज़ को रेगुलर किया जा सके। और इसके अलावा एक और कारण होता है

This WhatsApp में सरकार का रोल

बहुत कॉमन जो सरकार या डिपार्टमेंट द्वारा दिया जाता है कि फंड्स नहीं है हमारे पास। तो सरकार जनरली ऐसे मामलों में पल्ला झाड़ती है कह के कि हमारे पास फंड्स नहीं है इनको रेगुलर करने के लिए। सुप्रीम कोर्ट का जो रिसेंट जजमेंट इसका टाइटल है धर्म सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ यूपी और बेसिकली इस जजमेंट के अंदर फंड्स के बारे में भी बात की गई है।

स्टेट को स्पेशल डायरेक्शन भी दिए गए हैं। साथ में स्टेट से कंप्लायंस रिपोर्ट भी मांगी है। तो सुप्रीम कोर्ट की क्या ऑब्जरवेशन है? पूरा जजमेंट क्या है? बात करेंगे इस वीडियो में। एक बार फिर आपसे निवेदन है अगर आप लोग हमारे चैनल पे नए हैं तो प्लीज सब्सक्राइब चैनल एंड प्रेस द बेल आइकॉन।

देखिए दोस्तों, यह जजमेंट का जो पहला पैराग्राफ़ है, उसमें कोर्ट की ऑब्ज़रवेशन क्या है? द कंट्रोवर्सी बिफ़ोर अस इज़ नॉट अबाउट रिवॉर्डिंग इर्रेगुलर एंप्लॉयमेंट। इट इज़ अबाउट वेदर इयर्स ऑफ़ एडॉक एंगेजमेंट डिफेंडेड बाय शिफ्टिंग एक्सक्यूज़ एंड प्लेज़ ऑफ़ फाइनेंसियल स्ट्रेन।

क्या डिजिटल न्याय असल दुनिया के न्याय में जो एक मानवीय पहलू होता है, उसकी जगह पूरी तरह से ले सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर हम सबको सोचना चाहिए। ऐसी ही जानकारी के लिए सब्सक्राइब कीजिए techlabnol.com को। थैंक यू। देन चलिए नेक्स्ट लेख पर मिलते हैं।

भाईयों यदि ये This WhatsApp वाली मेरी जानकारी अच्छी लगी हो तो अपनी राय / प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये।

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