UPI Transactions Not Free में आज हम बात करने वाले हैं क्या हर यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर आपको कुछ अतिरिक्त UPI Transactions Not Free में राशि देनी पड़ेगी?
UPI Transactions Not Free के बारे में
तो यहां पर यही बात हो रही है। वैसे तो जब बजट वगैरह की बात हुई तो बहुत सारी योजनाओं के बारे में बात हुई तो बोला गया सरकार लगभग ₹2000 करोड़ सब्सिडी दे रही है यूपीआई पेमेंट या डिजिटल पेमेंट्स को और बेहतर बनाने के लिए। तो आखिरकार यह न्यूज़ निकल के कहां से आ रही है
कि जब आप यूपीआई पेमेंट करेंगे तो आपको कुछ एक्स्ट्रा पेमेंट करना पड़ेगा। तो क्या लिखा है? क्या हर यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर आपको अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा? तो सोशल मीडिया पर लगातार यह वायरल हो रहा है कि क्यूआर स्कैन जब भी आप करेंगे तो पहले आप कुछ एक्स्ट्रा पैसे देंगे तभी आपका पेमेंट हो पाएगा।
लेकिन अगर हम बात करें क्या यह सच है या नहीं? तो देखो एक चीज़ क्लियर रखनी है कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है। क्योंकि सरकार तो प्रयास कर रही है कि डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दिया जाए। अगर इस प्रकार का चार्ज लगना शुरू हो जाएगा तो डिजिटल पेमेंट जिसको हम बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं वो तो डीमोटिवेट हो जाएगा।
UPI Transactions Not Free में लोग डिजिटल पेमेंट क्यों करेंगे? अगर उनको हर बार एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ेंगे तो बिल्कुल भी सत्य नहीं है यह। बाकी अगर हम और अन्य पहलुओं पर बात करते हैं तो यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज आपके लिए नहीं लगने वाला है। चाहे वह पर्सन टू पर्सन आप पेमेंट करो या सामान्य व्यक्ति से किसी व्यापारी को भुगतान किया जाए।
क्योंकि कंफ्यूजन ये भी हो रहा था कि मान लीजिए कोई दो दोस्त हैं। उनका अकाउंट जो है वो नॉर्मल है तो वो ट्रांजैक्शन करेंगे तो पैसे नहीं लगेंगे। लेकिन बोला जा रहा था कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह पर ट्रांजैक्शन कर रहा है जिसमें पर्सन टू पर्सन ना हो के पर्सन टू व्यापारी या व्यापार टू व्यापारी कुछ ऐसा हो रहा है तो उनको कुछ एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ेंगे।
UPI Transactions Not Free में पर्सन टू पर्सन और पर्सन टू मर्चेंट
UPI Transactions Not Free में तो क्लियर कर दे रहां हूं। पर्सन टू पर्सन और पर्सन टू मर्चेंट में आपको कोई शुल्क देने की जरूरत नहीं है। आम उपभोक्ता को मात्र की स्कैन करना है। जो है अपना चार अंकों का कोड डालना है और आपका जो भी पेमेंट है वह आराम से हो जाएगा। कोई भी समस्या आपको देखने को नहीं मिलेगी। ठीक है? और ये जो भी चीजें चल रही हैं ऑफिशियली अभी घोषित नहीं की गई हैं।
2026 और 27 के बजट में यूपीआई को लेकर के क्या चर्चा हुई है उसको अगर हम देखें तो सरकार ने यूपीआई और रुपए डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया है। यह सहायता मर्चेंट डिस्काउंट रेट मॉडल को सपोर्ट करने के लिए बनाई गई। ये क्या होता है? मैं समझा दूंगी।
UPI Transactions Not Free का उद्देश्य क्या है
UPI Transactions Not Free में अब बात करते हैं इसका उद्देश्य क्या है? सरकार ने यह पैसे क्यों दिए हैं? क्यों देने की बात कही है? ताकि व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ ना पड़े। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके और छोटे दुकानदार भी यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कर पाएं और इसको अपनाते रहें।
अब एमडीआर क्या होता है जिसको हमने पढ़ा मर्चेंट डिस्काउंट रेट जिसको सरकार बढ़ावा दे रही है। तो एमडीआर वह शुल्क होता है जो बैंक पेमेंट सेवा प्रदाता व्यापारी से लेते थे। सोचो व्यापारियों से लिए जाने वाले पैसे को भी सरकार एडजस्ट कर रही है कि इनको ना देने पड़े ताकि यह भी थोड़ा सा मोटिवेटेड रहे चीजों को लेकर के।
तो वर्तमान में छोटे मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर सून रखा गया है। एक लिमिट रखी गई है कि अगर आप छोटा-मोटा कोई पेमेंट करेंगे भले ही आप व्यापारी हो बैंक को पेमेंट करें। आपको पैसे नहीं देने पड़ेंगे। पहले ऐसा होता था ना कि दुकानदार बोलता था कि अरे हमको पैसे भेजने पड़ते हैं तो एक्स्ट्रा पैसे लगते हैं।
वो कैश देने से मना करते थे। तो यह चीजें नहीं होंगी। सरकार सब्सिडी देकर के डिजिटल भुगतान के इकोसिस्टम को और टिकाऊ बनाना चाहती है। संत सागर का ढांचा देखें तो हम सबको पता है यूपीआई का संचालन एनपीसीआई द्वारा किया जाता है। नीति निर्माण में आरबीआई सारी भूमिका निभाता है।
UPI Transactions Not Free में भारत में UPI
UPI Transactions Not Free में यूपीआई भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रा का बहुत बड़ा या प्रमुख स्तंभ माना जाता है। अर्थव्यवस्था पर स्तंभ देखें तो डिजिटल समावेशन तो आज ₹5 से लेकर के ₹00 तक का ट्रांजैक्शन ऑनलाइन ही होता है। जिसमें दूध, दही, फल, सब्जी सब कुछ ऑनलाइन खरीदा जाए। तो सबको जो है यहां से जोड़ा गया है। कैशलेस अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है।
फिनtक नवाचार भी हो रहा है क्योंकि नए-नए इनोवेशंस कॉइन के माध्यम से जैसे क्यूआर आधारित भुगतान हो गया, ऑटो पे हो गया, यूपीआई लाइट ये सारी सुविधाएं लगातार लाई जा रही हैं। अफवाहें क्यों फैल रही है? तो एमडीआर और सब्सिडी मॉडल जब चर्चा में आया कि यह इस प्रकार से काम करेगा
तो कुछ लोग कंफ्यूज हो गए और इसको यूजर चार्ज समझने लगे कि शायद यूजी चार्ज के बारे में बात हो रही है और सोशल मीडिया पर इस प्रकार से सर्कुलेट हुआ कि लोगों को लगा कि यूपीआई अब पेमेंट करेंगे तो एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ेंगे। लोग क्यूआर कोड स्कैन कर करके चेक कर रहे थे कि पेमेंट के बाद जो ₹1 भेजा था वो एक ही गया है।
UPI Transactions Not Free में कुछ एक्स्ट्रा ऐड ऑन तो नहीं हुआ है। बात करते हैं चुनौतियां है तो एमडीआर संरचना का दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल बनाना बड़ी चुनौती है। साइबर सुरक्षा और फ्रॉड भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। छोटे व्यापारियों की डिजिटल साक्षरता को लेकर के अभी भी प्रश्न खड़ा होता है
कि क्या इतने समझदार हैं यह लोग? निष्कर्ष निकालिए अगर इस आर्टिकल का तो पहला तो है कि भाई कोई भी आपको पैसा नहीं देना है। पूरी तरीके से आपके लिए निशुल्क है। सरकार लेख में डिजिटल लेनदेन को हतोत्साहित नहीं प्रोत्साहित करना चाहती है। 2000 करोड़ का बजट आवंटन भी इसीलिए किया गया है।
UPI Transactions Not Free की वायरल भ्रामक खबरें हैं
वायरल जो भ्रामक खबरें हैं उनसे आपको दूर रहना है। अब एक प्रश्न हमारा है। यूपीआई प्रणाली का संचालन किस संसद द्वारा किया जाता है? विकल्प है सेबी, आरबीआई, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या फिर नीति आयोग। सही आंसर देना है आपको कमेंट बॉक्स में। आई होप यह आर्टिकल आपको समझ में आया होगा।
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दोस्तों UPI Transactions Not Free वाली मेरी ये जानकारी अच्छी लगी हो तो अपनी राय / प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये।






